कुदरत

लोग टेक्नोलॉजी में जितना आगे होते जा रहे है। हमारी जिंदिगी उतनी ही छोटी और पीछे चली जा रही है। क्या आप को इसका कारण पता है। नहीं पता चलिए हम आप को बताते है ।

इसका कारण है। पुराने ज़माने में लोग 100 साल से ज्यादा जीते थे। क्यकि उनका खान पान एक दम शुद्ध हर चीज जो खाते थे। पियोर ओरिजनल Organic खाते थे काम करते थे। उनको कसरत करने की जरूरत नहीं पड़ती थी। खेत में रोज सुबह -शाम काम करने से उनका शरीर तंदुरस्त और सेहतमंद बना रहता था। उनको खाने के लिए रोज मेहनत करना पड़ता था। मेहनत करने से भूख अच्छी लगती है खाना अच्छा लगता है। अच्छी नींद आती है। और शरीर में स्फूर्ति से भरा रहता है। पर आज कल लोग आलसी हो गये है। कुछ काम करना नहीं चाहते सब कुछ हाथों हाथ चाहिए लोगों को आज कल सब कुछ मिलावट से भरपूर है। हमारा शरीर कुदरत की देन है लेकिन हम उस शरीर को कुदरत से दूर क्यों ले जा रहे है। हम जितना कुदरत से दूर जायेगे बीमारियाँ उतनी ही ज्यादा हमारे पीछे आएगी। हमें कुदरत से प्यार करना चाहिए। कुदरत है तो हमारा जीवन है। कुदरत हमारी धरोहर है। कुदरत को बचाना चहिये। कुदरत नहीं तो हमारा जीवन भी नहीं रहेगा। हमें अपने आसपास जड़ी बूटियों के पेड़ पौधे लगाना चाहिए। ताकि शुद्ध हवा मिले और शुद्ध दवा भी मिले। कुदरत ने हमें सब कुछ दिया है पर हम इसे पहचान नहीं पाते है। जितना आप कुदरत से दूर जायेगे उतना ज्यादा आप बीमार हो जायेगे।

कुदरत ने हमें बेहतर से बेहतर पेड़,पौधे,बनस्पति और जड़ी बूटियों से भरे पड़े ये सुन्दर जंगल दिये है। आयुर्वेद में इन जड़ी बूटियों और बनस्पतियों का सबसे ज्यादा महत्व है। ये संसार अगर आयुर्वेदिक दवाइयों का प्रयोग कर तो किसी को भी कई बीमार नहीं लगेगी।